Sunday, June 21
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आधुनिक एफडीआर तकनीक से सुदृढ़ हो रहा करसोग का सड़क नेटवर्क

राज्य सरकार द्वारा सड़क अवसंरचना को सुदृढ़, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी सड़क विकास नीति अपनाई जा रही है। ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों तक आधुनिक तकनीक पर आधारित बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध करवाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके दृष्टिगत लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तृतीय चरण (पीएमजीएसवाई-3) में करसोग क्षेत्र में सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) का प्रयोग किया जा रहा है। 

सड़कें विकास की आधारशिला मानी जाती हैं। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, पर्यटन तथा व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलती है। करसोग क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ते यातायात दबाव के दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता प्रदान की जा रही है, ताकि लोगों को लंबे समय तक बेहतर, आरामदायक और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध हो सके।

*45 करोड़ से बेहतर बन रही चार सड़कें*

करसोग क्षेत्र की चार महत्वपूर्ण सड़कों का पुनर्निर्माण एफडीआर तकनीक के माध्यम से किया गया है। इनमें लगभग 17 किलोमीटर लंबी खील से भगालू सड़क, 11 किमी लंबी खील से कुफरी माहूंनाग, चलोग से बगैला लगभग 10 किलोमीटर तथा केलोधार से स्यांज सड़क लगभग 15 किलोमीटर शामिल है। इन सभी सड़कों के पुनर्निर्माण पर लगभग 44.50 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे है। इन सड़क परियोजनाओं से क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध हुई है तथा आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित बना है।

*यह है एफडीआर तकनीक*

एफडीआर अर्थात फुल डेप्थ रिक्लेमेशन सड़क पुनर्निर्माण की एक आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है। इस विधि में सड़क की पुरानी एवं क्षतिग्रस्त परतों को पूरी गहराई तक मशीनों की सहायता से उखाड़ कर पुनः उपयोग में लाया जाता है। पुरानी सामग्री को विशेष तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से मजबूत आधार परत में परिवर्तित किया जाता है, जिसके ऊपर नई सड़क का निर्माण किया जाता है। इस प्रक्रिया से सड़क की पूरी संरचना मजबूत होती है तथा निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित होती है, साथ ही पुरानी सामग्री के पुनः उपयोग से संसाधनों का संरक्षण भी होता है।

*इसलिए अपनाई जा रही यह तकनीक*

पारंपरिक सड़क मरम्मत कार्य में आमतौर पर केवल ऊपरी सतह को ठीक किया जाता है, जबकि सड़क की निचली परतों में मौजूद कमजोरियां बनी रहती हैं। इसके कारण कुछ समय बाद सड़क पर पुनः दरारें और गड्ढे बनने लगते हैं। एफडीआर तकनीक इन कमियों को दूर करती है और सड़क की पूरी संरचना को सुदृढ़ बनाती है।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में जहां वर्षा, तापमान में बदलाव तथा भौगोलिक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक होता है, वहां यह तकनीक अधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है। सड़क की आधारभूत संरचना मजबूत होने से उसकी भार वहन क्षमता बढ़ती है और सड़क लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहती है।

*अधिक मजबूत और टिकाऊ* 

एफडीआर तकनीक से निर्मित सड़कें सामान्य सड़कों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होती हैं। इस तकनीक से सड़कों की कार्यक्षमता बढ़ती है और रख-रखाव की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। परिणामस्वरूप सरकारी संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ लोगों को लंबे समय तक बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध होती है।

*पर्यावरण संरक्षण में सहायक*

एफडीआर तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। पुरानी सड़क सामग्री के पुनः उपयोग से, नई निर्माण सामग्री की आवश्यकता कम होती है तथा निर्माण मलबे का निस्तारण भी कम करना पड़ता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायता मिलती है।

करसोग क्षेत्र में एफडीआर तकनीक के माध्यम से सड़कों का पुनर्निर्माण प्रदेश सरकार की गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ अधोसंरचना निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है तथा लोगों के जीवन को अधिक सुगम बनाया जा रहा है।

*क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी*

लोक निर्माण विभाग मंडल करसोग के कार्यकारी अधिशाषी अभियंता अजय राज गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार की सड़क विकास नीति के तहत करसोग क्षेत्र में पीएमजीएसवाई-3 के अन्तर्गत बनने वाली सड़कों में एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण एवं पुनर्निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। यह तकनीक सड़कों की मजबूती और गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ उनकी आयु में भी वृद्धि करती है। करसोग उपमंडल में चार महत्वपूर्ण सड़कों का पुनर्निर्माण इस तकनीक से किया गया है, जिससे लोगों को बेहतर, सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़क सुविधा उपलब्ध होगी।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में एफडीआर के माध्यम से सड़क निर्माण एवं पुनर्निर्माण कार्य किए जाने से सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ उनकी उपयोग अवधि में भी वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।

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